अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा के लिए प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को शामिल होने का निमंत्रण दिया है। नई दिल्ली के सूत्रों ने रविवार (18 जनवरी 2026) को इसकी पुष्टि की, हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक इस आमंत्रण पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
‘बोर्ड ऑफ पीस फॉर गाज़ा’ राष्ट्रपति ट्रंप की शांति योजना का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। इस बोर्ड में दुनिया के चुनिंदा देशों को शामिल करने की योजना है, ताकि गाज़ा पट्टी के लिए एक वैकल्पिक और स्थायी शासन व्यवस्था तैयार की जा सके। इस पहल का उद्देश्य हमास पर दबाव बनाना है कि वह गाज़ा में अपनी प्रशासनिक भूमिका छोड़ दे और क्षेत्र में एक संक्रमणकालीन शासन व्यवस्था लागू की जा सके।
सूत्रों के अनुसार, यह बोर्ड गाज़ा में बनने वाली एक ट्रांजिशनल गवर्नेंस कमेटी की निगरानी करेगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इस समिति का काम युद्ध के बाद गाज़ा में प्रशासन, सुरक्षा, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना होगा।
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अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश की भागीदारी से इस पहल को वैश्विक वैधता और संतुलन मिलेगा। भारत की पश्चिम एशिया नीति, फिलिस्तीन मुद्दे पर संतुलित रुख और अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में उसकी भूमिका को देखते हुए यह निमंत्रण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि भारत इस प्रस्ताव पर सावधानीपूर्वक विचार करेगा, क्योंकि गाज़ा का मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है और इसमें अमेरिका, इज़रायल, फिलिस्तीन तथा अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के हित जुड़े हुए हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारत इस बोर्ड में शामिल होगा या नहीं, लेकिन यदि भारत इस पहल का हिस्सा बनता है, तो यह पश्चिम एशिया में उसकी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत कर सकता है और भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया आयाम जोड़ सकता है।
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