प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को टोक्यो में आयोजित भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा से एक महत्वपूर्ण भागीदार रहा है।
पीएम मोदी ने कहा, “मेट्रो से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, सेमीकंडक्टर से लेकर स्टार्टअप तक—भारत और जापान की साझेदारी हर क्षेत्र में आपसी विश्वास का प्रतीक बन गई है। भारत जापानी उद्योगों के लिए ग्लोबल साउथ का प्रवेश द्वार है।”
प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय यात्रा पर टोक्यो पहुंचे हैं। इस दौरान वे अपने जापानी समकक्ष शिगेरू इशिबा के साथ 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस बैठक में 2008 की सुरक्षा सहयोग घोषणा को उन्नत करने, रक्षा उपकरणों की खरीद पर सहयोग बढ़ाने, और “आर्थिक सुरक्षा” पहल शुरू करने पर सहमति बनने की संभावना है। इसके तहत महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने पर जोर होगा। जापान का निवेश लक्ष्य भी बढ़ाकर लगभग 68 अरब डॉलर करने की योजना है।
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दोनों प्रधानमंत्री एक संयुक्त बयान जारी करेंगे और 2035 विज़न स्टेटमेंट पेश करेंगे, जो 2015 में घोषित 2025 विज़न को उन्नत करेगा। यह बैठक 2005 में दिल्ली में हुए पहले वार्षिक शिखर सम्मेलन के 20 साल पूरे होने का प्रतीक भी है, जब जापान के प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमी ने पीएम मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी।
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