भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि भारत शक्सगाम घाटी में किसी भी प्रकार की गतिविधि को मंजूरी नहीं देता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच वर्ष 1963 में शक्सगाम घाटी को लेकर किया गया समझौता भारत की नजर में अवैध है और उसे भारत कभी स्वीकार नहीं करता।
मंगलवार (13 जनवरी, 2026) को एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत के जम्मू-कश्मीर क्षेत्र का हिस्सा है और इस पर भारत का वैध दावा है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि, निर्माण या समझौता भारत की संप्रभुता के खिलाफ है।
जनरल द्विवेदी ने भारत-चीन सीमा की स्थिति पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हालात फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए सतर्कता और सैन्य तैयारियों में किसी तरह की ढील नहीं दी जा सकती।
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सेना प्रमुख के अनुसार, भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना हर तरह की चुनौती से निपटने के लिए सक्षम और तैयार है। एलएसी पर स्थिरता के बावजूद, किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए निरंतर निगरानी और सतर्कता आवश्यक है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों से जुड़े मामलों में स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाता रहा है और आगे भी अपनाता रहेगा। शक्सगाम घाटी को लेकर भारत का रुख लंबे समय से साफ है और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है।
जनरल द्विवेदी के इस बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत की विदेश एवं रक्षा नीति के संदर्भ में अहम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब भारत-चीन संबंधों पर वैश्विक नजर बनी हुई है।
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