भारत सरकार ने श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित भारत-पाकिस्तान ट्रैक-2 संवाद से किसी भी आधिकारिक संबंध से इनकार किया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट कहा कि इस बैठक का भारत सरकार से कोई आधिकारिक जुड़ाव नहीं है और इसमें शामिल भारतीय प्रतिनिधि अपनी व्यक्तिगत क्षमता में भाग लेते हैं।
सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया में मीडिया से बातचीत के दौरान विक्रम मिस्री ने कहा कि दुनिया के कई देशों में इस तरह के अनौपचारिक संवाद नियमित रूप से आयोजित होते रहते हैं। उन्होंने कहा कि कोलंबो में आयोजित बैठक भी निजी संस्थाओं द्वारा आयोजित एक निजी कार्यक्रम था, जिसमें भारत सरकार की कोई आधिकारिक भागीदारी, समर्थन या भूमिका नहीं थी।
विदेश सचिव ने कहा कि यदि इस तरह की बैठकों में भारत के सेवानिवृत्त राजनयिक, पूर्व सैन्य अधिकारी या नागरिक समाज के सदस्य शामिल होते हैं, तो वे पूरी तरह अपनी व्यक्तिगत हैसियत से हिस्सा लेते हैं। उनके विचार उनके निजी विचार होते हैं और उन्हें भारत सरकार का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए।
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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई दिल्ली ऐसे ट्रैक-2 संवादों को न तो समर्थन देती है और न ही उन्हें कोई आधिकारिक महत्व देती है। सरकार इन बैठकों को अपनी विदेश नीति या आधिकारिक वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा नहीं मानती।
इस बीच, विक्रम मिस्री ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बैठक में द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने अपने-अपने वार्ताकारों को बातचीत में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
भारत सरकार का कहना है कि उसकी आधिकारिक विदेश नीति केवल सरकार द्वारा संचालित कूटनीतिक माध्यमों के जरिए ही आगे बढ़ाई जाती है और निजी मंचों पर होने वाली चर्चाओं का उससे कोई संबंध नहीं होता।
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