भारत में खुदरा महंगाई जुलाई में बढ़कर 4.45 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसके साथ ही महंगाई लगातार दूसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के चार प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। जून में खुदरा महंगाई 4.38 प्रतिशत दर्ज की गई थी। जुलाई का आंकड़ा नई 2024 आधार वर्ष वाली उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखला के तहत अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.84 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.96 प्रतिशत रही। इससे पता चलता है कि ग्रामीण उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक रहा।
खाद्य महंगाई में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक के आधार पर खाद्य महंगाई जुलाई में 5.52 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 5.32 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में मजबूती ने कुल खुदरा महंगाई को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में महंगाई बढ़ने के पीछे व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा, रेस्तरां और आवास सेवाओं, खाद्य एवं पेय पदार्थों तथा नशीले उत्पादों की कीमतों में वृद्धि प्रमुख कारण रही।
अखिल भारतीय स्तर पर संयुक्त रूप से जिन वस्तुओं में महंगाई सबसे अधिक रही, उनमें चांदी, सोना, हीरा और प्लैटिनम के आभूषण, अदरक, लहसुन और प्याज शामिल हैं। इन वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ा।
वहीं, कुछ वस्तुओं में महंगाई अपेक्षाकृत कम रही। इनमें आलू, मोटर कार और जीप, भिंडी, मटर तथा टमाटर प्रमुख रहे।
जुलाई के आंकड़े ऐसे समय आए हैं जब महंगाई पर खाद्य कीमतों और घरेलू मांग के प्रभाव को लेकर नजर बनी हुई है। आरबीआई के लिए भी मुद्रास्फीति का चार प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर रहना मौद्रिक नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।
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