वैश्विक सप्लाई चेन में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच भारत दक्षिण कोरिया के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बन सकता है। सियोल में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में आर्थिक विशेषज्ञों और व्यापार एजेंसियों ने यह राय व्यक्त की।
दक्षिण कोरिया के उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान के साथ हुई बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत की विशाल आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बड़े बाजार की वजह से कोरियाई कंपनियों के लिए यहां अपार संभावनाएं मौजूद हैं। बैठक में भारत में कोरियाई कंपनियों की मौजूदगी बढ़ाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की आबादी करीब 140 करोड़ है और देश का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है। ऐसे में भारत वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। हालांकि, बुनियादी ढांचे की कमी और जटिल नियमों के कारण भारतीय बाजार में प्रवेश करना अब तक कई कोरियाई कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है।
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बैठक में सुझाव दिया गया कि भारत में दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए विशेष औद्योगिक कॉम्प्लेक्स विकसित किए जाएं, जिससे यहां कारोबार करने वाली कंपनियों का खर्च और प्रशासनिक बोझ कम हो सके।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि वर्तमान में भारत में कार्यरत कई कोरियाई कंपनियां केवल भारतीय बाजार के लिए उत्पादन कर रही हैं। अब भारत को दक्षिण कोरिया के लिए वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए।
पिछले महीने भारत दौरे के दौरान दक्षिण कोरिया के उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के लिए संयुक्त समिति गठित करने पर सहमति जताई थी। इसके अलावा व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
भारत और दक्षिण कोरिया की कंपनियों के बीच इस दौरान इस्पात, जहाज निर्माण, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में 20 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए गए।
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