भारतीय सेना ने सोमवार को उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ की है। सेना ने इन खबरों को “गलत और बिना किसी आधार के” बताया है।
सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया, “हमने कुछ मीडिया रिपोर्ट देखी हैं, जिनमें हाल ही में चीनी पीएलए द्वारा अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ और कैंप स्थापित करने का दावा किया गया है। ये रिपोर्ट पूरी तरह गलत और निराधार हैं।”
कुछ स्थानीय और अन्य मीडिया संस्थानों ने दावा किया था कि चीन की सेना ने अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में पिछले छह वर्षों में कई जगहों पर कब्जा किया है। ये दावे नाह जनजातीय समुदाय के लोगों के बयानों पर आधारित बताए गए थे।
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नाह वेलफेयर सोसाइटी (NWS) के अध्यक्ष केरू चादेर ने आरोप लगाया था कि चीनी सैनिकों ने उनके पारंपरिक चरागाह और शिकार क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि 2020 से कई इलाके चीनी नियंत्रण में हैं, जिससे स्थानीय लोगों को पशु चराने में दिक्कत हो रही है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे भारतीय सेना पर पूरा भरोसा रखते हैं, जो वर्षों से इस क्षेत्र की सुरक्षा कर रही है।
इस बीच, भारत और चीन के बीच 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद तनाव काफी बढ़ गया था, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। बाद में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई।
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी कहा कि एलएसी पर स्थिति स्थिर है और दोनों देशों के बीच 1,100 से अधिक ग्राउंड लेवल संपर्क हो चुके हैं ताकि गलतफहमी न हो। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क और सक्षम है और देश की अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
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