मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय तेल रिफाइनर अब ईरान से कच्चे तेल की खरीद दोबारा शुरू करने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ऊर्जा संकट को कम करने के लिए कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है।
The Indian Witness के अनुसार, भारतीय रिफाइनर फिलहाल सरकार के निर्देशों और वॉशिंगटन से भुगतान शर्तों जैसी प्रक्रियाओं पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। भारत के तेल भंडार अन्य बड़े एशियाई आयातकों की तुलना में कम हैं, जिसके चलते हाल ही में अमेरिकी ढील के बाद भारतीय कंपनियों ने तेजी से रूस से तेल खरीद बढ़ाई थी। अब ईरानी तेल की उपलब्धता से उन्हें और विकल्प मिल सकते हैं।
इस बीच, अन्य एशियाई देश भी ईरानी तेल खरीदने की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड की कीमत युद्ध से पहले करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो इस सप्ताह बढ़कर लगभग 119.50 डॉलर तक पहुंच गई।
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अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह अस्थायी अनुमति केवल उन ईरानी तेल खेपों के लिए है जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं और इसमें नए उत्पादन या खरीद की इजाजत नहीं दी गई है। इस कदम से वैश्विक बाजार में करीब 140 मिलियन बैरल तेल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे आपूर्ति पर दबाव कम होगा।
यह छूट शुक्रवार से लागू हुई है और 19 अप्रैल तक जारी रहेगी। हालांकि, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरान को इस तेल से मिलने वाले राजस्व तक सीमित पहुंच ही मिलेगी और उस पर दबाव बनाए रखा जाएगा।
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