भारत के वैज्ञानिकों ने एक नई ‘स्मार्ट’ कैंसर दवा विकसित की है, जिसे मुख्य रूप से कैंसर कोशिकाओं के भीतर सक्रिय होने के लिए डिजाइन किया गया है। इस दवा का नाम आरके-251 रखा गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में अधिक लक्षित उपचार का विकल्प बन सकती है, क्योंकि सामान्य कीमोथेरेपी स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
यह शोध विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत स्वायत्त संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में उन्नत अध्ययन संस्थान (आईएएसएसटी) के डॉ. आशीष बाला और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-गुवाहाटी के डॉ. के. पी. भाबक के नेतृत्व में किए गए सहयोगात्मक अध्ययन का परिणाम है।
आरके-251 को इस तरह विकसित किया गया है कि यह सामान्य ऊतकों में अपेक्षाकृत निष्क्रिय रहे, लेकिन कैंसर कोशिकाओं के भीतर मौजूद विशेष परिस्थितियों में सक्रिय हो जाए। कैंसर कोशिकाओं में अक्सर रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज यानी आरओएस का स्तर अधिक होता है। वैज्ञानिकों ने इसी विशेषता का उपयोग करते हुए दवा तैयार की है।
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जब आरके-251 अधिक आरओएस स्तर वाली कैंसर कोशिका में प्रवेश करती है, तो आरओएस इसे सक्रिय कर देता है और एनबीडीएचईएक्स नामक कैंसर-रोधी यौगिक मुक्त होता है। यह यौगिक उन प्रोटीनों को निशाना बनाता है, जिनका उपयोग कई कैंसर कोशिकाएं जीवित रहने और उपचार के प्रभाव से बचने के लिए करती हैं।
प्रीक्लिनिकल प्रयोगों में आरके-251 ने ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ मजबूत प्रभाव दिखाया, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम पाया गया। जेब्राफिश भ्रूणों पर किए गए अध्ययन में भी स्पष्ट विषाक्तता के संकेत नहीं मिले।
हालांकि, आरके-251 अभी प्रीक्लिनिकल अनुसंधान चरण में है और मनुष्यों पर क्लिनिकल परीक्षण से पहले इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक होंगे। शोध के निष्कर्ष जर्नल ऑफ मेडिसिनल केमिस्ट्री में प्रकाशित हुए हैं।
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