भारत ने अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिधमन को आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया है। इससे देश की समुद्री रक्षा क्षमता और परमाणु त्रिस्तरीय (न्यूक्लियर ट्रायड) प्रणाली को और मजबूती मिली है। इससे पहले भारतीय नौसेना में आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात शामिल हो चुकी हैं।
आईएनएस अरिधमन को कई महीनों तक समुद्री परीक्षण (सी ट्रायल) के बाद सेवा में शामिल किया गया है। यह परियोजना अत्यंत गोपनीय मानी जाती है और भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास परमाणु शक्ति से संचालित पनडुब्बियां हैं। इन देशों में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन शामिल हैं।
भारत की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को जुलाई 2009 में लॉन्च किया गया था और 2016 में इसे चुपचाप नौसेना में शामिल किया गया। इसके बाद अगस्त 2024 में दूसरी पनडुब्बी आईएनएस अरिघात को शामिल किया गया। एसएसबीएन (SSBN) का मतलब “शिप सबमर्सिबल बैलिस्टिक न्यूक्लियर” होता है, यानी ऐसी पनडुब्बियां जो परमाणु ऊर्जा से चलती हैं और बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस होती हैं।
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जानकारी के अनुसार, इस महत्वपूर्ण अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी केरल स्थित नौसैनिक अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद रहे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। उन्होंने कहा, “यह शब्द नहीं, शक्ति है — अरिधमन।”
भारत पहले ही जमीन और हवा से परमाणु हमले की क्षमता विकसित कर चुका है। अब समुद्र के भीतर से परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। आईएनएस अरिधमन के शामिल होने से भारत की रणनीतिक शक्ति और भी सशक्त हो गई है।
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