होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर किसका नियंत्रण? युद्धविराम के बाद ईरान और ट्रंप आमने-सामने
अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। ईरान नियंत्रण चाहता है, जबकि ट्रंप ने भी अमेरिकी भूमिका का दावा किया।
अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच नियंत्रण की होड़ तेज हो गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसी को लेकर विवाद गहराता दिख रहा है।
ईरान ने अमेरिका के सामने पेश अपनी 10-सूत्रीय योजना में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण की मांग की है। ईरान चाहता है कि तेल और ऊर्जा आपूर्ति के सुरक्षित मार्ग के प्रोटोकॉल तय करने का अधिकार भी उसके पास हो। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ओमान के साथ मिलकर इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क भी लगा सकता है, जिसका उपयोग पुनर्निर्माण कार्यों में किया जाएगा।
इसके अलावा, जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही ईरानी सेना की निगरानी में नियंत्रित तरीके से कराई जा सकती है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इसे बड़ी जीत बताते हुए कहा कि उसने अमेरिका को अपनी 10-सूत्रीय योजना मानने के लिए मजबूर किया है।
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वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस स्थिति को अपनी जीत बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में यातायात प्रबंधन में मदद करेगा और सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सुचारु बनाने में सहयोग करेगा।
अब इस युद्धविराम का अगला चरण 10 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली बैठक है, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधि अंतिम समझौते की शर्तों पर चर्चा करेंगे। अमेरिका अपनी ओर से ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को पूरी तरह बंद करने की मांग रख सकता है, जिसे ईरान पहले ही खारिज कर चुका है।
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
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