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मेटा ने अमेरिका में किशोरों को हुए नुकसान पर चुकाए अरबों, भारत में एल्गोरिदम पर अब भी नहीं कोई ठोस लगाम

मेटा ने अमेरिका में बच्चों को सोशल मीडिया की लत और नुकसान पहुंचाने के आरोपों के निपटारे के लिए भारी रकम देने पर सहमति जताई, भारत में नियमन कमजोर है।

अमेरिकी कंपनी मेटा ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए बच्चों और किशोरों को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाने के मामलों को निपटाने के लिए 16.68 अरब डॉलर देने पर सहमति जताई है। यह रकम करीब 1.59 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। अमेरिका में 29 राज्यों के दावों के निपटारे के बाद कंपनी को किशोरों के लिए दैनिक उपयोग की सीमाएं, रात में प्रतिबंध और कुछ उत्पादों में बदलाव जैसे कदम उठाने होंगे। मेटा ने हालांकि किसी गलत काम से इनकार किया है।

अमेरिकी अधिकारियों और शोधकर्ताओं ने लंबे समय से सोशल मीडिया के किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी सर्जन जनरल के मुताबिक, सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल किशोरों में अवसाद और चिंता का जोखिम लगभग दोगुना कर सकता है। कई किशोरों ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया के कारण उन्हें अपने शरीर को लेकर नकारात्मक महसूस होता है।

मेटा के अपने विज्ञापन आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत में इंस्टाग्राम की पहुंच करीब 48.1 करोड़ और फेसबुक की पहुंच करीब 40.3 करोड़ लोगों तक थी। भारत की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यहां भी सोशल मीडिया के एल्गोरिदम और उसके प्रभावों पर गंभीर चर्चा जरूरी है।

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मुद्दा केवल यह नहीं है कि कोई व्यक्ति आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करता है। बड़ा सवाल यह है कि मेटा का एल्गोरिदम उस सामग्री को किसे दिखाता है, कितनी बार दिखाता है और उपयोगकर्ता को लगातार उसी तरह की सामग्री देखने के लिए क्यों प्रेरित करता है।

भारत में फरवरी 2026 से अवैध सामग्री हटाने की समयसीमा को और कम किया गया है, लेकिन यह व्यवस्था मुख्य रूप से किसी विशेष पोस्ट को हटाने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत ऐसे नियमों की है जो पूरे अनुशंसा तंत्र और बच्चों के लिए बनाए गए व्यसनी डिजाइन की भी जांच करें।

भारत को 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए वास्तविक आयु सत्यापन, स्वतंत्र एल्गोरिदम ऑडिट, शोधकर्ताओं को अनाम डेटा की उपलब्धता और बड़े प्लेटफॉर्म पर प्रभावी जुर्माने जैसे उपायों पर विचार करना चाहिए।

मेटा के मामले में अमेरिका ने जहां बच्चों की सुरक्षा को लेकर कंपनी से जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, वहीं भारत के सामने अब यह सवाल है कि वह अपनी विशाल युवा आबादी को डिजिटल प्लेटफॉर्म के संभावित नुकसान से कैसे सुरक्षित रखेगा। केवल हानिकारक पोस्ट हटाना पर्याप्त नहीं होगा; प्लेटफॉर्म की पूरी प्रणाली को सुरक्षित बनाना जरूरी है।

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