नेपाल ने भारत, चीन और अमेरिका से मांगा जलवायु मुआवजा, बाढ़ की तबाही को लेकर संयुक्त राष्ट्र में उठाएगा मुद्दा
नेपाल ने विनाशकारी भोतेकोशी बाढ़ से हुए नुकसान के लिए भारत, चीन और अमेरिका से जलवायु मुआवजे की मांग की है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह संयुक्त राष्ट्र में मुद्दा उठा सकते हैं।
नेपाल ने विनाशकारी भोतेकोशी बाढ़ से हुए जान-माल के भारी नुकसान के बाद जलवायु मुआवजे की मांग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। नेपाल ने भारत, चीन और अमेरिका को दुनिया के प्रमुख ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशों में शामिल करते हुए कहा है कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव झेल रहे कमजोर देशों को आर्थिक सहायता और मुआवजा मिलना चाहिए।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में शामिल होने की संभावना है। ऐसे में वह न्यूयॉर्क में नेपाल की स्थिति रखते हुए जलवायु न्याय और आर्थिक सहायता की मांग उठा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र 8 सितंबर से शुरू होना है, जबकि आम बहस सितंबर के तीसरे और चौथे सप्ताह में प्रस्तावित है।
सहायता नहीं, न्याय और मुआवजे की मांग
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि प्राकृतिक आपदा के बाद मिलने वाली सहायता को केवल मानवीय मदद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि इसे नैतिक जिम्मेदारी और मुआवजे के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
खनाल के अनुसार, जिन देशों का वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में बड़ा योगदान है, उनकी जिम्मेदारी उन देशों के प्रति भी होनी चाहिए जो जलवायु परिवर्तन से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जबकि उनका उत्सर्जन में योगदान अपेक्षाकृत कम है। नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित लॉस एंड डैमेज फंड से तत्काल वित्तीय सहायता की मांग भी की है।
‘हिमालयी सुनामी’ से भारी तबाही
26 अगस्त को भोतेकोशी नदी बेसिन में आई भीषण बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया। घर, सड़कें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा। हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। नेपाल ने इस आपदा को ‘हिमालयी सुनामी’ बताया है। खबर के मुताबिक 1,100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ का संबंध नेपाल-चीन सीमा के पास हुए बड़े चट्टान और बर्फीले हिमस्खलन से जोड़ा गया है।
भारत लगातार कर रहा राहत अभियान
नेपाल जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुआवजे की मांग कर रहा है, वहीं भारत ने राहत और बचाव अभियान तेज कर रखा है। बुधवार को भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की पांचवीं खेप भेजी, जिसमें 11 सदस्यीय बचाव दल और 5.5 टन से अधिक जरूरी दवाएं शामिल थीं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, आपदा के बाद भारत अब तक नेपाल को कुल 68.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है। भारत ने डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और विशेषज्ञ तकनीकी दलों को भी सहायता के लिए भेजा है। अब तक 12,000 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को बाढ़ के दिन ही नेपाली प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की थी और संकट से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया था।
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