मक्का समझौते पर पाकिस्तान का यू-टर्न, हूती हमलों के बाद कहा- यह रक्षात्मक गठबंधन है
सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर अपना रुख बदलते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिरोध पर आधारित रक्षात्मक गठबंधन बताया है।
पाकिस्तान ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर अपने रुख में अचानक बदलाव किया है। सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच पाकिस्तान ने साफ किया है कि समझौता मुख्य रूप से एक रक्षात्मक गठबंधन है और इसका उद्देश्य प्रतिरोध के जरिए क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता सुनिश्चित करना है।
मक्का समझौता 7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुआ था। इसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। समझौते के बाद इसे कई लोगों ने ‘इस्लामिक नाटो’ तक बताया था। हालांकि, अब पाकिस्तान इस समझौते के सैन्य इस्तेमाल को लेकर अधिक सावधानी बरतता नजर आ रहा है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने कहा कि फिलहाल समझौते के विस्तार को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही है। उनके मुताबिक पहले पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की को अपने संगठन और सहयोग को और मजबूत करना होगा।
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यह स्पष्टीकरण पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सऊदी अरब पर हूती हमले मक्का समझौते को सक्रिय कर सकते हैं। मंगलवार को हूतियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से पर मिसाइलों की बौछार की थी, जिसमें कम से कम 73 लोग घायल हुए थे।
ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि यदि यमन में जारी संघर्ष का असर सऊदी अरब तक पहुंचता है तो समझौता निश्चित रूप से लागू होगा और पाकिस्तान उसकी शर्तों का पालन करेगा। इसके बाद विदेश मंत्रालय के बयान को पाकिस्तान के रुख में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
इस बीच, समझौते में नए देशों को शामिल करने की संभावना भी बनी हुई है। बांग्लादेश और मिस्र ने इसमें रुचि दिखाई है, हालांकि अभी किसी नए सदस्य के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान के अनुसार संगठन की संरचना, तंत्र और प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने के लिए अभी महत्वपूर्ण काम बाकी है। समझौता समान विचार रखने वाले देशों के लिए खुला रहेगा।
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