ईरान से जुड़े हालिया शांति समझौते ने अमेरिका और इजरायल के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत संबंधों में एक नई दरार पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस समझौते को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रहा है, जबकि इजरायल के कई वरिष्ठ नेता इसे देश की सुरक्षा चिंताओं के लिए अपर्याप्त मान रहे हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने समझौते का जोरदार बचाव करते हुए इजरायली नेताओं की आलोचना की। उनका कहना था कि हर सुरक्षा चुनौती का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई नहीं हो सकती। वेंस ने इजरायल को याद दिलाया कि अमेरिका उसका सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली सहयोगी है तथा दोनों देशों के रिश्तों को कमजोर करना किसी के हित में नहीं है।
व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान वेंस ने कहा कि इजरायल को यह समझना होगा कि केवल बल प्रयोग के जरिए सभी राष्ट्रीय सुरक्षा समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच की आलोचना करते हुए पूछा कि उनकी वैकल्पिक रणनीति क्या है।
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दूसरी ओर, इजरायली नेताओं का कहना है कि यह समझौता ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं करता। बेन-गवीर ने ईरान से उत्पन्न खतरे की तुलना नाजी जर्मनी से करते हुए कहा कि कड़ी सैन्य कार्रवाई अभी भी जरूरी है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर उनका देश दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा अभियान जारी रखेगा। हाल के दिनों में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच भी बयानबाजी तेज हुई है। ट्रंप ने कुछ इजरायली सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए कहा कि वे कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
यह शांति समझौता पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और बड़े क्षेत्रीय संघर्ष को रोकने के उद्देश्य से किया गया है। हालांकि इसके भविष्य और प्रभाव को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद लगातार गहराते दिखाई दे रहे हैं।
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