ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ समझौते पर जल्द फैसला लिया जाएगा। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी भी प्रकार की अंतिम सहमति नहीं बनी है और वह किसी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं लेगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान ने 47 वर्ष पहले ही “करना ही होगा” जैसी भाषा को अलविदा कह दिया था। उन्होंने कहा, “कोई भी पश्चिमी देश इस्लामी गणराज्य ईरान से बात करते समय आदेशात्मक भाषा का प्रयोग नहीं कर सकता। हम अपने फैसले ईरानी जनता के हितों और अधिकारों के आधार पर स्वयं लेते हैं।”
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लागू नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जा रही है और ईरान के साथ समझौते पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नाकाबंदी के कारण फंसे जहाज अब अपने घरों की ओर लौट सकते हैं।
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इस्माइल बघाई ने अमेरिकी समुद्री प्रतिबंधों को शुरुआत से ही “अवैध” बताया। उनका कहना था कि ये कदम 8 अप्रैल से लागू युद्धविराम की शर्तों और समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा कि अभी यह देखना बाकी है कि अमेरिका वास्तव में अपने दावों पर अमल करता है या यह केवल प्रचार का हिस्सा है।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष और ईरानी जहाजों एवं बंदरगाहों के खिलाफ अमेरिकी कदमों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में निगरानी और नियंत्रण कड़ा कर दिया था।
बघाई ने यह भी कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष वार्ता जारी है। इन वार्ताओं में संघर्ष समाप्त करने, समुद्री मुद्दों और विदेशों में मौजूद ईरानी संपत्तियों से जुड़े विषयों पर चर्चा हो रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु मुद्दे पर फिलहाल कोई बातचीत नहीं हो रही है।
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