ईरान की एक अदालत ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को छह साल की जेल की सजा सुनाई है। उनके वकील मुस्तफा निली ने रविवार (8 फरवरी 2026) को यह जानकारी दी। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
वकील के अनुसार अदालत ने नरगिस मोहम्मदी को “अपराध करने के लिए एकत्रित होने और साजिश रचने” के आरोप में दोषी ठहराया है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर देश छोड़ने पर दो साल का प्रतिबंध भी लगाया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान में मानवाधिकारों और महिलाओं की आजादी को लेकर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय आलोचना जारी है।
नरगिस मोहम्मदी लंबे समय से ईरान में महिलाओं के अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मृत्युदंड के खिलाफ अभियान चलाती रही हैं। उन्हें कई बार गिरफ्तार किया जा चुका है और वे पिछले वर्षों में भी जेल में रह चुकी हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से मानवाधिकारों की आवाज उठाती रही हैं।
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मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। उनका कहना है कि यह कदम ईरान में असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस मामले पर चिंता जताई है और ईरान से मानवाधिकारों का सम्मान करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है। नरगिस मोहम्मदी का मामला पहले भी वैश्विक सुर्खियों में रहा है और उन्हें 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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