ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर ने गुरुवार (22 जनवरी, 2026) को वॉशिंगटन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी सेना की “उंगली ट्रिगर पर है”, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य अब भी बातचीत में रुचि दिखा रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब बीते सप्ताह ईरान के खिलाफ तत्काल अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका कुछ कम होती दिखी है और दोनों पक्ष कूटनीति को मौका देने की बात कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के महीनों में कई बार यह संकेत दिया है कि यदि हालात बिगड़े तो ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई एक विकल्प बना रह सकता है। जून में अमेरिका ने इज़रायल का समर्थन करते हुए 12 दिनों तक चले युद्ध में भाग लिया था, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक कार्यक्रमों को कमजोर करना था। हालांकि ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम हथियार बनाने के लिए नहीं है।
दावोस में विश्व आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने पिछले साल ईरान के यूरेनियम संवर्धन ठिकानों पर हमले इसलिए किए ताकि वह परमाणु हथियार न बना सके। “हम ऐसा होने नहीं दे सकते। ईरान बातचीत चाहता है और हम बातचीत करेंगे”।
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इस बीच, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपौर ने इज़रायल और अमेरिका को चेतावनी दी कि वे किसी भी “गलत आकलन” से बचें। उन्होंने कहा कि ईरान पहले से कहीं अधिक तैयार है और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के आदेशों को लागू करने के लिए तत्पर है।
एक अन्य वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी जनरल अली अब्दोल्लाही अलीआबादी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने हमला किया, तो “अमेरिकी हित, ठिकाने और प्रभाव के सभी केंद्र” ईरानी सशस्त्र बलों के लिए वैध लक्ष्य होंगे।
ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए थे। सरकार के अनुसार 3,117 लोगों की मौत हुई, जबकि मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि यह संख्या कहीं अधिक हो सकती है। इसी बीच, कड़े इंटरनेट शटडाउन ने वास्तविक स्थिति की पुष्टि को और कठिन बना दिया है।
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