संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान राज्यसभा में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
जयशंकर ने बताया कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया। इसके बाद तेहरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों, इज़राइली लक्ष्यों और खाड़ी देशों पर जवाबी हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई।
विदेश मंत्री ने कहा कि इस संघर्ष का भारत पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं और बड़ी संख्या में छात्र तथा कामगार ईरान में भी मौजूद हैं। साथ ही भारत की ऊर्जा जरूरतें भी इस क्षेत्र से जुड़ी हैं।
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उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावासों ने 24 घंटे अलर्ट मोड में काम करते हुए बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाया है। पिछले दिन तक लगभग 67,000 भारतीय सुरक्षित सीमा पार कर चुके थे। तेहरान में भारतीय दूतावास ने छात्रों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किया और व्यापारिक यात्रियों को आर्मेनिया के रास्ते बाहर निकलने में मदद की।
जयशंकर ने यह भी बताया कि जनवरी से ही भारतीय नागरिकों को लगातार यात्रा सलाह जारी की जा रही थी, जिसमें अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई थी।
विदेश मंत्री ने सदन को बताया कि युद्ध के दौरान दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई और एक अभी भी लापता है। उन्होंने इन घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त किया।
उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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