विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जापान के कुमामोतो प्रांत में आए 7.1 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद जापान की सरकार और वहां के लोगों के प्रति भारत की एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की सुरक्षा और शीघ्र स्वस्थ होने के लिए भारत प्रार्थना करता है।
विदेश मंत्री ने जारी अपने संदेश में कहा कि कुमामोतो में आए शक्तिशाली भूकंप की खबर से वह गहराई से चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में भारत जापान के साथ मजबूती से खड़ा है और राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी जापानी सरकार के प्रयासों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करता है।
मंगलवार को स्थानीय समयानुसार शाम करीब 4:27 बजे जापान के दक्षिण-पश्चिमी क्यूशू क्षेत्र में आए इस भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी गई। जापान की भूकंपीय तीव्रता मापने वाली प्रणाली में इसे अधिकतम स्तर-7 दर्ज किया गया। वर्ष 2024 के नोटो प्रायद्वीप भूकंप के बाद यह देश में सबसे शक्तिशाली झटका माना जा रहा है, जबकि वर्ष 2016 के दोहरे भूकंपों के बाद कुमामोतो में पहली बार इतनी तीव्रता का भूकंप आया है।
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भूकंप के तुरंत बाद जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने राहत और बचाव कार्यों के समन्वय के लिए आपातकालीन आपदा प्रतिकार मुख्यालय का गठन किया। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता प्रभावित लोगों की खोज और बचाव है। साथ ही भोजन, पेयजल, पोर्टेबल शीतलन उपकरण तथा बिजली आपूर्ति से जुड़े संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
प्रधानमंत्री ने कुमामोतो के राज्यपाल किमुरा से भी बातचीत कर हालात की जानकारी ली और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।
भूकंप के कारण कई इमारतें ढह गईं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और कई स्थानों पर आग लगने की घटनाएं सामने आईं। लगातार आ रहे झटकों के बीच जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्स और राहत दल प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान चला रहे हैं।
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