भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ने ईरान के IRIS लावन युद्धपोत को कोच्चि में शरण दी, इसे मानवीय कदम बताते हुए उन्होंने कहा कि यह सही निर्णय था। भारत ने इस कदम को UNCLOS (संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून) और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उचित बताया और कहा कि युद्धपोत को शरण देने का निर्णय मानवता के दृष्टिकोण से लिया गया था।
IRIS लावन और अन्य ईरानी युद्धपोत भारत के अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक समीक्षा (International Fleet Review) में शामिल हुए थे, लेकिन जब यूएस ने IRIS डेना को श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय जल में डुबो दिया, तब स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ईरान ने भारत से IRIS लावन को शरण देने की गुहार लगाई, क्योंकि उसे तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। भारत ने मार्च 1, 2026 को उसे शरण दी, और वह युद्धपोत कोच्चि में 183 सदस्यीय दल के साथ पहुंचा।
डॉ. जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत ने मानवीय दृष्टिकोण से ईरान की मदद की, जबकि श्रीलंका में एक अन्य जहाज के मामले में एक व्यक्ति की जान चली गई थी। इसके साथ ही उन्होंने भारत के सामरिक दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया और कहा कि भारत का योगदान इस क्षेत्र में बढ़ रहा है।
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यह कदम भारत के क्षेत्रीय सहयोगियों और वैश्विक साझेदारों के लिए एक सकारात्मक संदेश भेजता है, जिससे भारत की बढ़ती ताकत और समृद्धि का फायदा सभी को मिलेगा।
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