विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पाकिस्तान पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने और आतंकवाद को सही ठहराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करता रहेगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन का जवाब देते हुए जयशंकर ने इस्लामाबाद को ‘‘आतंकवाद का लगातार अभ्यास करने वाला देश’’ बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के सामने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया और आतंकवाद को सामान्य बताने की कोशिश की।
जयशंकर ने कहा, ‘‘आतंकवाद का लगातार अभ्यास करने वाले ने इस सभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने के लिए तर्क दिए गए। यह स्वीकार्य नहीं होगा।’’
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उन्होंने कहा कि आतंकवाद और दोस्ती या सद्भावना एक साथ नहीं चल सकते। जयशंकर ने जोर दिया कि आतंकवाद के जिम्मेदार लोगों को अपना रास्ता बदलना होगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों से दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया।
खाड़ी संघर्ष पर जताई चिंता
जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष ने पहले से कठिन वैश्विक परिस्थितियों को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले नाविकों पर हमलों की निंदा की। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि संघर्षों से दूर रहने वाले देशों को भी बिना किसी गलती के नुकसान उठाना पड़ रहा है। भारत ने ऊर्जा और व्यापार के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख
जयशंकर ने यूक्रेन संघर्ष को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पांचवें वर्ष में पहुंच चुका यह युद्ध गंभीर चिंता का विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लंबे संघर्षों को समाप्त करने के आह्वान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘अंतहीन युद्ध को अब युद्ध की समाप्ति का रास्ता देना चाहिए।’’
भारत शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों का समर्थन करता है। जयशंकर ने कहा कि शांति प्रक्रिया के दौरान नाविकों की सुरक्षा, खाद्यान्न और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है।
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