जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संसद को भंग कर दिया है, जिससे देश में मध्यावधि चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। जापान में अब 8 फरवरी को आम चुनाव कराए जाएंगे। साने ताकाइची देश की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और उन्होंने यह कदम अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने और सत्तारूढ़ दल के लिए जनसमर्थन वापस हासिल करने के उद्देश्य से उठाया है।
शुक्रवार को जापान की संसद के स्पीकर ने निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) को औपचारिक रूप से भंग करने संबंधी पत्र पढ़कर सुनाया। इस दौरान सदन में मौजूद सांसदों ने पारंपरिक नारा “बंज़ाई” लगाकर इस घोषणा का स्वागत किया। इसके साथ ही जापान की चुनावी प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई।
प्रधानमंत्री ताकाइची ने सोमवार को ही यह संकेत दे दिया था कि वह मध्यावधि चुनाव कराने का इरादा रखती हैं। माना जा रहा है कि वह अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता का लाभ उठाकर हाल के वर्षों में जनता के बीच सत्तारूढ़ दल को हुए भारी नुकसान की भरपाई करना चाहती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सरकार को आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और सामाजिक मुद्दों को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण जनसमर्थन में गिरावट आई।
और पढ़ें: उत्तर भारत में बदला मौसम का मिज़ाज: दिल्ली में बारिश, कश्मीर में बर्फबारी
ताकाइची के नेतृत्व में यह चुनाव जापान की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री होने के नाते उनके फैसलों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं। यदि सत्तारूढ़ दल इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करता है, तो इससे ताकाइची के नेतृत्व को मजबूती मिलेगी और सरकार को नीतिगत सुधारों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
वहीं, विपक्षी दल इस चुनाव को सरकार की नीतियों के खिलाफ जनमत संग्रह के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में 8 फरवरी को होने वाला यह चुनाव जापान की राजनीति की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है।
और पढ़ें: एनाज़ आर्काइव का दावा: एनवीडिया से हमारा कभी कोई सीधा लेन-देन नहीं हुआ