केरल में महत्वाकांक्षी K-रेल (सिल्वर लाइन) परियोजना के आगे न बढ़ पाने के बाद अब राज्य सरकार उत्तर और दक्षिण के जिलों को जोड़ने के लिए एक नई हाई-स्पीड परिवहन व्यवस्था पर विचार कर रही है। केरल मंत्रिमंडल ने राज्य के सबसे दक्षिणी जिले तिरुवनंतपुरम से लेकर सबसे उत्तरी जिले कासरगोड तक रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद जारी एक बयान में कहा गया कि राज्य सरकार इस परियोजना के प्रति अपनी रुचि व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार को एक औपचारिक पत्र भेजेगी। केंद्र से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद राज्य और केंद्र सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
केरल सरकार को अपने प्रमुख K-रेल प्रोजेक्ट को छोड़ना पड़ा था, जिसे सिल्वर लाइन के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस परियोजना को भारतीय रेलवे का समर्थन नहीं मिल सका। इसके बाद राज्य में तेज़ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था के लिए नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
और पढ़ें: अरुंधति रॉय: फासीवाद के खिलाफ खड़े अंतिम गढ़ों में केरल शामिल
आरआरटीएस को लेकर मंत्रिमंडल की मंजूरी ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले ‘मेट्रो मैन’ के नाम से प्रसिद्ध भाजपा नेता ई. श्रीधरन ने तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक एक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा था। कन्नूर, कासरगोड से सटा हुआ एक उत्तरी जिला है। श्रीधरन ने कहा था कि करीब एक लाख करोड़ रुपये की इस परियोजना पर केंद्र सरकार विचार कर रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि केंद्र सरकार दो सप्ताह के भीतर इस परियोजना की घोषणा कर सकती है और इस संबंध में उनकी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से बातचीत भी हो चुकी है। यदि आरआरटीएस या हाई-स्पीड रेल परियोजना अमल में आती है, तो इससे केरल में यात्रा का समय घटेगा और उत्तर-दक्षिण क्षेत्रों के बीच संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
और पढ़ें: कांग्रेस से निष्कासित विधायक राहुल ममकूटाथिल यौन उत्पीड़न मामले में हिरासत में