केरल स्कूल कलोत्सव 2026 के तहत त्रिशूर में आयोजित चेंडा मेलम प्रतियोगिता में युवा कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से सबका दिल जीत लिया। त्रिशूर को आमतौर पर ‘पूरमों की धरती’ के रूप में जाना जाता है, जहां ढोल-नगाड़ों की तेज गूंज और पारंपरिक ताल शहर की पहचान मानी जाती है। ऐसे में जब चेंडा मेलम जैसे पारंपरिक वाद्य प्रदर्शन मंच पर हों, तो भारी भीड़ की उम्मीद स्वाभाविक होती है।
गुरुवार (15 जनवरी 2026) की सुबह होली फैमिली सीजीएचएसएस परिसर में जब छात्रों ने पूरे उत्साह के साथ ‘पंचारी मेलम’ की लय और ‘आडंथा मेलम’ की जटिल ताल संरचनाओं को प्रस्तुत किया, तो वातावरण जोश और ऊर्जा से भर गया। हालांकि, इसके बावजूद दर्शकों की संख्या अपेक्षा से कम रही। तेज और रोमांचक तालों के बीच छात्रों का समर्पण और अभ्यास साफ झलक रहा था।
प्रतियोगिता में भाग लेने वाली हर टीम के लिए यह दिन खास रहा, क्योंकि सभी टीमों को ‘ए ग्रेड’ से सम्मानित किया गया। यह इस बात का प्रमाण था कि प्रतिभागियों ने उच्च स्तर की कला और अनुशासन का प्रदर्शन किया। वायनाड से आई सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय, वडुवंचल की टीम के प्रधानाचार्य के.वी. मनोज ने बताया कि उनकी टीम को त्रिशूर में प्रस्तुति को लेकर काफी उम्मीदें थीं।
और पढ़ें: ईरान में इंटरनेट बंदी के बाद कश्मीरी अभिभावकों में दहशत, छात्रों से संपर्क टूटा
उन्होंने कहा, “यहां तालवाद्य कला को खास महत्व दिया जाता है, इसलिए हमें उम्मीद थी कि ज्यादा लोग आकर इन युवा कलाकारों का उत्साह बढ़ाएंगे। अगर यह कार्यक्रम मुख्य मंच पर आयोजित होता, तो शायद दर्शकों की संख्या भी अधिक होती।” बावजूद इसके, छात्रों का उत्साह कम नहीं हुआ और उन्होंने पूरे मनोयोग से अपनी प्रस्तुति दी।
इस प्रतियोगिता ने न केवल पारंपरिक केरल संगीत की समृद्ध विरासत को सामने रखा, बल्कि यह भी दिखाया कि नई पीढ़ी इस सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
और पढ़ें: सुकमा में 52 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, ₹1.41 करोड़ का इनामी बोझ छोड़ा