तमिलनाडु में निजी स्कूलों की संपत्तियों के हस्तांतरण (एलियनेशन) पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून की संवैधानिक वैधता को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। ऑल इंडिया प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एसोसिएशन (एआईपीईए) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले को स्वीकार कर लिया है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की प्रथम खंडपीठ ने तमिलनाडु सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया। याचिका में तमिलनाडु प्राइवेट स्कूल (रेगुलेशन) अधिनियम, 2019 की धारा 30 को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता संगठन का कहना है कि इस धारा के तहत निजी स्कूलों की संपत्तियों की बिक्री, हस्तांतरण, गिरवी रखने या अन्य प्रकार के निपटान पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए हैं, जो संविधान के अनुरूप नहीं हैं। संगठन ने अदालत में तर्क दिया कि यह प्रावधान विधायी अधिकार क्षेत्र से बाहर है और राज्य सरकार ने अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है।
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याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित प्रावधान सिविल अदालतों के अधिकार क्षेत्र में अनावश्यक हस्तक्षेप करता है। संगठन का आरोप है कि सरकार ने ऐसे अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं, जिनका निर्णय केवल सक्षम न्यायालयों द्वारा किया जाना चाहिए।
एआईपीईए ने अदालत से धारा 30 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि यह प्रावधान लागू रहता है तो निजी शैक्षणिक संस्थानों के संपत्ति संबंधी अधिकार प्रभावित होंगे और उनके प्रशासनिक कार्यों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
मद्रास हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। सरकार के जवाब के बाद अदालत इस बात पर विचार करेगी कि संबंधित प्रावधान संविधान और कानून के अनुरूप है या नहीं। इस मामले का फैसला तमिलनाडु के निजी स्कूलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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