महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को कैबिनेट बैठक में धर्मांतरण विरोधी (एंटी-कन्वर्जन) विधेयक को मंजूरी दे दी। यह विधेयक जल्द ही महाराष्ट्र विधानसभा में पेश किया जाएगा।
राज्य के मंत्री नितेश राणे ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में लंबे समय से धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानून की मांग उठ रही थी। उन्होंने बताया कि कई हिंदुत्व संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वर्षों से इस तरह के कानून की मांग की थी।
राणे के अनुसार, नए कानून के तहत किसी व्यक्ति को जबरन धर्म परिवर्तन कराने या लालच देकर धर्मांतरण करवाने को गैर-जमानती अपराध माना जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कानून के तकनीकी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।
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मंत्री ने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र का यह प्रस्तावित कानून मध्य प्रदेश और गुजरात में लागू धर्मांतरण विरोधी कानूनों से अधिक सख्त और प्रभावी होगा।
इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने जबरन धर्म परिवर्तन और तथाकथित “लव जिहाद” जैसे मामलों से जुड़े कानूनी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह विधेयक तैयार किया गया है।
इस बीच मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर दिए गए फैसले पर भी नितेश राणे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदें और अन्य स्थान उपलब्ध हैं, इसलिए सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने की आवश्यकता नहीं है।
राणे ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों का उपयोग शिक्षा और अन्य सामाजिक कार्यों के लिए होना चाहिए।
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