महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के मराठी भाषा ज्ञान की जांच के लिए चलाए जा रहे अभियान के दूसरे दिन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) ने 1,499 गैर-मराठी भाषी चालकों को नोटिस जारी किया। परिवहन विभाग का यह अभियान गुरुवार से शुरू हुआ है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यावसायिक यात्री वाहन चलाने वाले चालकों को रोजमर्रा की बातचीत के लिए मराठी का पर्याप्त ज्ञान हो।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुंबई महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर) को छोड़कर महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में 5,299 ऑटो और टैक्सी चालकों की भाषा परीक्षा ली गई। इनमें 777 चालक मराठी के कार्यसाधक ज्ञान की परीक्षा में अपेक्षित स्तर पर नहीं पाए गए।
वहीं एमएमआर में कुल 3,482 चालकों की जांच की गई, जिनमें से 722 चालक परीक्षा पास नहीं कर सके। इन सभी मामलों में आवश्यक कार्रवाई के तहत नोटिस जारी किए गए।
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पहले दिन 8,217 चालकों की हुई जांच
अभियान के पहले दिन 8,217 चालकों की परीक्षा ली गई थी। इनमें ऑटो-रिक्शा और टैक्सी समेत व्यावसायिक यात्री वाहन चलाने वाले 1,268 चालकों को भाषा दक्षता परीक्षा में असफल रहने पर नोटिस दिया गया था। इनमें से 604 नोटिस एमएमआर क्षेत्र में जारी किए गए थे।
आरटीओ अधिकारियों के अनुसार जांच फ्लाइंग स्क्वॉड के माध्यम से भी की जा रही है। इसके अलावा आरटीओ कार्यालयों में वाहन फिटनेस प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के दौरान भी चालकों का भाषा ज्ञान जांचा जा रहा है। यह अभियान 30 सितंबर तक जारी रहने की संभावना है।
चालकों से रोजमर्रा की परिस्थितियों पर आधारित 16 सवालों की परीक्षा ली जा रही है। इसमें यात्रियों से गंतव्य, रास्ते, किराया, मीटर, मार्ग और स्टैंड से संबंधित बातचीत शामिल है।
राज्य सरकार ने टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए मराठी का कार्यसाधक ज्ञान अनिवार्य किया है। इसके लिए महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 में भी संशोधन किया गया है।
सरकार पहले गैर-मराठी भाषी चालकों के लिए मराठी प्रशिक्षण अभियान शुरू कर चुकी है। 105 दिनों के अभियान में 1.65 लाख चालकों ने प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाणपत्र हासिल किया। हालांकि, कुछ चालक संगठनों और सेवानिवृत्त आरटीओ अधिकारियों ने ‘कार्यसाधक ज्ञान’ की स्पष्ट परिभाषा और मानक तय नहीं होने पर सवाल उठाए हैं।
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