भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए फ्रांस ने संकेत दिया है कि वह राफेल लड़ाकू विमानों के लिए तकनीक हस्तांतरण (ToT) और भारतीय हथियार प्रणालियों के एकीकरण को लेकर पूरी तरह सहमत है।
यह महत्वपूर्ण विकास ऐसे समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जून से फ्रांस की यात्रा पर जाने वाले हैं। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें रक्षा सहयोग प्रमुख एजेंडा होगा।
फ्रांसीसी सूत्रों के अनुसार, 114 नए राफेल जेट्स के प्रस्तावित सौदे में ‘मेक इन इंडिया’ एक केंद्रीय भूमिका निभाएगा। भारत ने इस सौदे के लिए फ्रांस को आधिकारिक ‘लेटर ऑफ रिक्वेस्ट’ भेज दिया है, जो सरकारी स्तर पर रक्षा खरीद प्रक्रिया की शुरुआत का औपचारिक दस्तावेज होता है।
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इस प्रस्तावित समझौते के तहत नए राफेल विमान भारत में ही तैयार किए जाएंगे, जिसमें दासो एविएशन और एक भारतीय कंपनी की साझेदारी होगी। भारत ने इसमें कई शर्तें रखी हैं, जिनमें स्वदेशी हथियारों का एकीकरण, भारतीय डेटा लिंक सिस्टम और डिजिटल नेटवर्किंग क्षमता शामिल है।
फ्रांस ने स्पष्ट किया है कि वह रक्षा संबंधों को केवल ग्राहक–आपूर्तिकर्ता संबंध के रूप में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखता है।
नई पीढ़ी के राफेल विमान एडवांस्ड AESA रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता, लंबी दूरी की मिसाइलें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम से लैस होंगे। इससे भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता और बढ़ेगी।
इस परियोजना में 55–60 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री शामिल होने की उम्मीद है, जिससे भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को बड़ा बल मिलेगा। यदि यह सौदा पूरा होता है, तो भारत के पास कुल 176 राफेल विमान होंगे, जो उसकी वायु शक्ति को नई ऊंचाई देंगे।
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