पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने रविवार (25 जनवरी 2026) को चुनाव आयोग (ईसीआई) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आयोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के “कहने पर” विपक्ष को कुचल रहा है और भारत के लोकतंत्र की बुनियाद को नष्ट कर रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय मतदाता दिवस के आयोजन को “दुखद तमाशा” करार दिया।
ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग “हिज मास्टर्स वॉयस” की तरह काम कर रहा है और लोगों के मतदान अधिकार “छीनने” में लगा हुआ है। उन्होंने कहा, “भाजपा, जो उनका मास्टर है, उसके behalf पर विपक्ष को बुलडोज़ किया जा रहा है और भारतीय लोकतंत्र की नींव को तोड़ा जा रहा है। इसके बावजूद उन्हें मतदाता दिवस मनाने का साहस है।”
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) को अत्यधिक जल्दबाजी में करवा रहा है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया बिना पर्याप्त समय और पारदर्शिता के की जा रही है, जिससे आम नागरिकों के मताधिकार पर खतरा पैदा हो रहा है।
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ममता बनर्जी ने कहा कि आयोग “तार्किक विसंगति” के नाम पर नए-नए बहाने खोज रहा है, ताकि लोगों को परेशान किया जा सके और उन्हें उनके चुनावी अधिकारों से वंचित किया जा सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईसीआई का मौजूदा रवैया निष्पक्ष और संवैधानिक संस्था के अनुरूप नहीं है।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि एक ओर चुनाव आयोग राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहा है, वहीं दूसरी ओर वही संस्था मतदाताओं के अधिकारों को कमजोर कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त की।
इस बयान के बाद चुनाव आयोग की भूमिका और पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।
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