पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारी हार के बाद भी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख एवं निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह राज्यपाल भवन जाकर अपना इस्तीफा नहीं सौंपेंगी और न ही उन्होंने चुनाव हारा है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने 293 में से 207 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस को केवल 80 सीटें मिलीं। इस परिणाम के साथ भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 15 साल पुराने टीएमसी शासन का अंत कर दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा कि यह जनता का असली जनादेश नहीं बल्कि “साजिश” का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 100 सीटों पर जनादेश “लूटा गया” और मतगणना प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की गई।
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उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर किया है। ममता ने ईवीएम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि मशीनों की बैटरी 80-95% कैसे दिखाई दे सकती है।
उन्होंने भाजपा पर चुनाव आयोग के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया और कहा कि लगभग 90 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए और बाद में कुछ नाम फिर जोड़े गए।
ममता ने दावा किया कि चुनाव के दौरान उनके कार्यकर्ताओं पर हमले हुए और मतगणना केंद्रों पर हिंसा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खुद मतगणना के दौरान धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता जैसे सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने उनसे संपर्क कर समर्थन जताया है और अब विपक्षी एकता को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।
इस बीच, चुनाव परिणाम में भाजपा की भारी जीत ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है।
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