कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार के संतुलित और सतर्क रुख का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भारत को इस जटिल संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने से बचना चाहिए, क्योंकि “यह हमारी लड़ाई नहीं है।”
मनीष तिवारी ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कोई एकल संघर्ष नहीं, बल्कि कई स्तरों पर चल रही जटिल स्थिति है। उन्होंने कहा कि भारत ऐतिहासिक रूप से पश्चिम एशिया में सीमित भूमिका निभाता रहा है और उसे अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का प्राथमिक लक्ष्य अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना होना चाहिए। तिवारी ने कहा, “यदि हम सतर्क रहते हैं, तो हम सही कर रहे हैं, क्योंकि यही रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है—अपने हितों की रक्षा करना और परिस्थिति के अनुसार संतुलन बनाना।”
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भारत ने इस पूरे संकट के दौरान “संवाद और कूटनीति” पर जोर दिया है। जहां एक ओर भारत ने खाड़ी क्षेत्र में ईरानी हमलों की आलोचना की, वहीं दूसरी ओर तेहरान के साथ संवाद भी बढ़ाया है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल और गैस की आपूर्ति सुचारू बनी रहे।
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
भारत इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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