अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच हुई मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि दोनों देशों के बीच किसी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत हुई है। हालांकि, उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से ईरान को बचाने में मदद करने वाले देशों को चेतावनी दी।
एक साक्षात्कार के दौरान रुबियो से प्रधानमंत्री मोदी और पेजेश्कियन की मुलाकात को लेकर सवाल पूछा गया। यह बैठक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी।
रुबियो ने कहा कि उन्हें भारत और ईरान के बीच किसी व्यापार समझौते पर बातचीत की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देश अपनी स्वतंत्र विदेश नीति अपनाते हैं और कई देश ईरानी शासन के साथ बातचीत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने भी विभिन्न मुद्दों पर ईरानी पक्ष के लोगों से संपर्क किया है।
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हालांकि, रुबियो ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी देश को ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश ईरान को प्रतिबंधों से बचने या राजस्व जुटाने में मदद करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
पीएम मोदी की पेजेश्कियन से मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियन की बिश्केक में एससीओ सम्मेलन से इतर मुलाकात हुई थी। अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी। संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में भी वृद्धि हुई है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने के सभी प्रयासों के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत ईरान के साथ अपने व्यापारिक संबंधों का विस्तार और उन्हें अधिक विविध बनाना चाहता है।
वहीं, पेजेश्कियन ने मोदी से विभिन्न पक्षों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल कर संघर्ष समाप्त कराने में मदद करने का आग्रह किया।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और सभी मुद्दों का समाधान बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से करने की भारत की स्थायी नीति दोहराई। उन्होंने समुद्री आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने तथा नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे, वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर भी जोर दिया।
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