बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों (CSAM) को लेकर उठे विवाद के बीच मेटा ने अपनी सफाई जारी करते हुए कहा है कि कंपनी की नीतियां बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त हैं और ऐसे विज्ञापनों को उसके सिस्टम ने पहले ही प्लेटफॉर्म से हटा दिया था। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस तरह के कंटेंट को किसी भी परिस्थिति में बढ़ावा नहीं देती।
पिछले सप्ताह भारत सरकार ने इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों के मामले में मेटा को नोटिस जारी किया था। सरकार ने कंपनी के अधिकारियों को तलब कर इस तरह के कंटेंट और विज्ञापनों को लेकर जवाब मांगा था। इसके बाद मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा ने ब्लॉग पोस्ट जारी कर अपना पक्ष रखा।
मेटा ने कहा कि बच्चों का यौन शोषण एक घृणित अपराध है और कंपनी इंस्टाग्राम तथा फेसबुक पर ऐसे अपराधों को रोकने के लिए हर दिन आक्रामक तरीके से कार्रवाई करती है। कंपनी के अनुसार, जैसे ही उसके प्रवर्तन (Enforcement) सिस्टम को ऐसे विज्ञापनों की जानकारी मिली, उसने कई आपत्तिजनक विज्ञापनों को निष्क्रिय कर दिया और उनसे जुड़े अकाउंट्स को भी ब्लॉक कर दिया।
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कंपनी ने यह भी बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। संदिग्ध विज्ञापनों, संबंधित अकाउंट्स और उनसे जुड़े यूआरएल की पहचान कर उन्हें लगातार हटाया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
मेटा ने यह दावा भी किया कि वह आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान करता है। कंपनी के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक लगभग 40 लाख संदिग्ध अकाउंट्स हटाए जा चुके हैं। मेटा ने कहा कि वह भारत सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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