कमजोर पड़े खंभे से शुरू हुआ था दिल्ली की इमारत गिरने का सिलसिला, एआई पुनर्रचना से सामने आई पूरी तस्वीर
दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हुई। प्रारंभिक जांच में कमजोर खंभे, बेसमेंट में पानी और मरम्मत कार्य को संभावित कारण माना गया।
दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य घायल हुए। करीब 50 साल पुरानी इस इमारत में पेइंग गेस्ट के तौर पर लगभग 75 छात्र रहते थे।
एआई पुनर्रचना में हादसे के संभावित घटनाक्रम को दिखाया गया है। करीब 50 फुट ऊंची और लगभग 55 वर्ग गज के भूखंड पर बनी इमारत कुछ ही सेकंड में मलबे में बदल गई और कई लोग उसके नीचे दब गए।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था और यहीं से ढहने की शुरुआत होने की आशंका है। बताया गया है कि इमारत कई महीनों से एक तरफ झुकने लगी थी, लेकिन अधिकांश निवासियों को इसकी जानकारी नहीं थी।
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मरम्मत के दौरान बेसमेंट का एक खंभा कमजोर हो गया। इसके बावजूद काम जारी रहा और इमारत का झुकाव बढ़ता गया। मिट्टी की खुदाई के दौरान जैक या अस्थायी संरचनात्मक सहारे नहीं लगाए गए थे। लगातार बारिश के कारण बेसमेंट में पानी भी जमा हो गया।
एआई पुनर्रचना में दिखाया गया है कि कमजोर हुए खंभे के सहारे में कमी आने के बाद उसका असर ऊपर की मंजिलों तक पहुंचा। एक के बाद एक मंजिलों का संतुलन बिगड़ता गया और कुछ ही क्षणों में पूरी इमारत ढह गई।
मामले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, मालिक हरिराम बंसल, जिन्हें गुप्ता के नाम से भी जाना जाता है, और उनके भाई पर पुरानी इमारत में चार अतिरिक्त मंजिलें बनाकर किराये से अधिक कमाई करने का आरोप है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रारंभिक जांच में बेसमेंट में पानी जमा होने और पुरानी इमारत में चल रहे मरम्मत कार्य के बीच संबंध सामने आया है। उन्होंने बताया कि करीब 80 प्रतिशत मलबा हटाया जा चुका है और केवल बेसमेंट का मलबा बाकी है।
दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी कहा कि बेसमेंट में चल रहा काम हादसे का कारण हो सकता है। जांचकर्ता अब खंभे, बेसमेंट और मरम्मत कार्य की स्थिति की जांच कर रहे हैं।
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