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देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उन पर रिश्वतखोरी और सहायक शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया की निलंबित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला कथित रिश्वतखोरी और एक सहायक अध्यापक को आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ा हुआ है। अदालत के इस फैसले को मामले में बड़ा झटका माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, शालिनी श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने विभागीय कार्यों के बदले रिश्वत की मांग की थी। इसी मामले में एक सहायक शिक्षक ने मानसिक उत्पीड़न और दबाव का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आने के बाद शालिनी श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान शालिनी श्रीवास्तव की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत की मांग की गई। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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सरकारी पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और उन्हें अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। वहीं, बचाव पक्ष ने कहा कि शालिनी श्रीवास्तव को गलत तरीके से फंसाया गया है और उनका मामले से सीधा संबंध नहीं है।

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अदालत के फैसले के बाद अब शालिनी श्रीवास्तव की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग और प्रशासनिक हलकों में भी काफी चर्चा हो रही है।

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