भूपेंद्र यादव ने वन प्रबंधन क्षमता बढ़ाने वाली जापान समर्थित परियोजना शुरू की
भूपेंद्र यादव ने जेआईसीए समर्थित वन प्रबंधन परियोजना शुरू की। 537.10 करोड़ रुपये की पहल से सभी राज्यों में वनकर्मियों का प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता, जलवायु कार्रवाई और जैव विविधता संरक्षण मजबूत होगा।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को वन प्रबंधन की क्षमता मजबूत करने से जुड़ी जापान समर्थित परियोजना की शुरुआत की। पर्यावरण मंत्रालय और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में परियोजना के उद्देश्यों और कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
‘प्रभावी वन प्रबंधन के लिए क्षमता संवर्धन परियोजना’ को 2025-26 से 2031-32 तक लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य बदलती वन एवं वन्यजीव प्रबंधन जरूरतों, जलवायु और पर्यावरणीय चुनौतियों तथा वनकर्मियों की बढ़ती जिम्मेदारियों के अनुरूप अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना है।
कार्यशाला में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जेआईसीए इंडिया, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वन विभागों, शोध संस्थानों तथा केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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क्षेत्र आधारित प्रशिक्षण पर जोर
उद्घाटन सत्र में भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह परियोजना वन क्षेत्र में भारत और जापान के लंबे सहयोग में महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि वन जलवायु परिवर्तन से निपटने, जैव विविधता संरक्षण और वन-निर्भर समुदायों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मंत्री ने वनकर्मियों की परिचालन और प्रशासनिक दोनों क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने वनाग्नि को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि परियोजना के माध्यम से वनाग्नि प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में तकनीकी तथा जमीनी क्षमताएं बढ़ाई जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण केवल कक्षा आधारित प्रशिक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आधुनिक तकनीक, जमीनी अनुभव और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के व्यावहारिक इस्तेमाल पर आधारित होना चाहिए। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय परिस्थितियों और चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करने पर जोर दिया गया।
परियोजना के तहत व्यावहारिक तकनीकी समाधान के लिए शोध एवं विकास, पायलट परियोजनाएं, प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करना और सार्क देशों तथा अन्य विकासशील देशों के साथ बेहतर तौर-तरीकों को साझा करने की योजना है।
537.10 करोड़ रुपये का प्रावधान
मंत्रालय के अनुसार, सात वर्षीय परियोजना का कुल बजट 537.10 करोड़ रुपये है। इसमें जेआईसीए 440.42 करोड़ रुपये और भारत सरकार 96.68 करोड़ रुपये का योगदान देगी। परियोजना में देश के सभी राज्यों को शामिल किया जाएगा।
जेआईसीए इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधि ईजी वाकामात्सु ने बताया कि भारत के साथ वन क्षेत्र में एजेंसी का सहयोग करीब तीन दशक पुराना है और इससे सात लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है। परियोजना के दूसरे चरण में लकड़ी प्रसंस्करण, आजीविका, डिजिटल वन प्रबंधन और संयुक्त अकादमिक शोध पर ध्यान दिया जाएगा।