वैश्विक निवेश को बढ़ावा देने के लिए बजट में टोल मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन, MAT में छूट का प्रस्ताव
बजट 2026 में वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए टोल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देते हुए गैर-निवासियों को पांच साल की आयकर छूट और MAT से राहत देने का प्रस्ताव किया गया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (1 फरवरी, 2026) को संसद में बजट पेश करते हुए भारत में वैश्विक कारोबार और निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से कई अहम घोषणाएं कीं। इनमें देश में टोल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और गैर-निवासियों को कर संबंधी बड़ी राहत देना प्रमुख है। वित्त मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के टोल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े गैर-निवासियों को पांच वर्षों तक आयकर से छूट देने का प्रस्ताव रखा है।
वित्त मंत्री ने बताया कि यह पांच साल की कर छूट उन सभी गैर-निवासियों पर लागू होगी, जो किसी बॉन्डेड जोन यानी कस्टम-नियंत्रित क्षेत्र में स्थित घरेलू टोल मैन्युफैक्चरर को पूंजीगत वस्तुएं, उपकरण या टूलिंग उपलब्ध कराते हैं। यह प्रावधान खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक सामान के निर्माण से जुड़े मामलों में लागू होगा। सरकार का मानना है कि इससे भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, बजट में न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) व्यवस्था को भी तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि अनुमानित आधार (Presumptive Basis) पर कर चुकाने वाले सभी गैर-निवासियों को MAT से पूरी तरह छूट दी जाएगी। इससे विदेशी कंपनियों और निवेशकों के लिए भारत में कारोबार करना आसान होगा और कर संबंधी जटिलताएं कम होंगी।
और पढ़ें: ट्रंप की टैरिफ धमकियों पर पीएम मोदी का बजट से जवाब, भारत की अर्थव्यवस्था को सुरक्षा कवच
सरकार के अनुसार, टोल मैन्युफैक्चरिंग मॉडल से विदेशी कंपनियों को भारत में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किए बिना उत्पादन का अवसर मिलेगा, जबकि घरेलू उद्योग को तकनीक, उपकरण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का लाभ मिलेगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी मजबूती मिलेगी।
वित्त मंत्रालय का कहना है कि इन कर प्रोत्साहनों से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को खासतौर पर गति मिलेगी और भारत को चीन के विकल्प के रूप में वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक गंतव्य बनाया जा सकेगा। बजट के ये प्रस्ताव देश में रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।