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सीजेपी हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने दर्ज कीं पांच एफआईआर, सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों की पहचान जारी

सीजेपी संसद मार्च हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने पांच एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस सीसीटीवी, ड्रोन और मोबाइल वीडियो की मदद से आरोपियों की पहचान कर जांच आगे बढ़ा रही है।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सोमवार को हुए "चलो संसद" मार्च के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में अब तक पांच एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, सुरक्षाकर्मियों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की जांच कर रही है।

सोमवार को सीजेपी के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी। पुलिस का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया, सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया और सार्वजनिक संपत्ति को क्षतिग्रस्त किया। इस घटना में 118 से अधिक पुलिसकर्मी, जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, घायल हुए थे। वहीं करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

पुलिस के मुताबिक, दर्ज एफआईआर कनॉट प्लेस थाना, संसद मार्ग थाना और अन्य थानों में दर्ज की गई हैं। एक एफआईआर संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली क्षेत्र में बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने के मामले में दर्ज की गई है।

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इसके अलावा हिंसा की साजिश, सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित मामले भी दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, शस्त्र अधिनियम 1959 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं।

दिल्ली पुलिस ने जांच के लिए वीडियो साक्ष्यों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। अधिकारियों ने बताया कि मोबाइल रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन वीडियो और पुलिस बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग सहित 250 से अधिक वीडियो की जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हिंसा में शामिल लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं और क्या प्रदर्शन के दौरान हिंसा किसी पूर्व योजना के तहत की गई थी।

जांच में कुछ व्हाट्सऐप और टेलीग्राम समूहों की भी जांच की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, "चलो संसद" और "जेएनयू संसद चलो कोऑर्डिनेशन" जैसे समूहों में साझा किए गए संदेशों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आपत्तिजनक संदेश साझा करने वाले लोगों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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