इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग योजना के तहत 22 प्रस्तावों को मंजूरी, ₹41,863 करोड़ का निवेश प्रस्तावित
सरकार ने ECMS के तहत 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। ₹41,863 करोड़ निवेश और ₹2.58 लाख करोड़ उत्पादन से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्र सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने शुक्रवार (2 जनवरी 2026) को बताया कि इन स्वीकृत प्रस्तावों के तहत ₹41,863 करोड़ के निवेश और ₹2,58,152 करोड़ के उत्पादन का अनुमान है।
मंत्रालय के अनुसार, जिन कंपनियों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, उनमें डिक्सन, सैमसंग डिस्प्ले नोएडा प्राइवेट लिमिटेड, फॉक्सकॉन (युज़हान टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड) और हिंदाल्को इंडस्ट्रीज़ शामिल हैं। इन परियोजनाओं से देशभर में लगभग 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
इससे पहले सरकार ने 24 आवेदनों को ₹12,704 करोड़ के निवेश के साथ मंजूरी दी थी। अब तीसरे चरण में 22 और प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को संबंधित कंपनियों को स्वीकृति पत्र प्रदान किए।
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मंत्रालय द्वारा जारी पृष्ठभूमि नोट के अनुसार, इन मंजूरियों में 11 लक्षित उत्पाद श्रेणियों का निर्माण शामिल है, जिनका उपयोग मोबाइल निर्माण, टेलीकॉम, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और आईटी हार्डवेयर जैसे कई क्षेत्रों में किया जाएगा।
ये परियोजनाएं आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित आठ राज्यों में फैली हुई हैं। यह भौगोलिक रूप से संतुलित औद्योगिक विकास और देशभर में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विस्तार पर सरकार के फोकस को दर्शाता है।
11 उत्पादों में से 5 बेसिक कंपोनेंट्स हैं, जैसे पीसीबी, कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोजर और ली-आयन सेल। तीन सब-असेंबली से जुड़े हैं, जिनमें कैमरा मॉडल, डिस्प्ले मॉडल और ऑप्टिकल ट्रांसीवर शामिल हैं, जबकि तीन सप्लाई चेन से संबंधित उत्पाद हैं, जैसे एल्यूमिनियम एक्सट्रूज़न, एनोड मटीरियल और लैमिनेट।
मंत्रालय ने कहा कि इन मंजूरियों से घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी, आयात पर निर्भरता घटेगी और भारत में उच्च मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।