×
 

हरसिमरत कौर बादल के मावां-धीयां अभियान से बदले सियासी तेवर, बादल परिवार की विरासत की नई परीक्षा

हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब में महिलाओं के मुद्दों पर ‘मावां-धीयां’ अभियान शुरू किया है। नशे, पुलिस कार्रवाई और अधिकारों को लेकर उन्होंने सभाएं और विरोध मार्च किए।

शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब में महिलाओं पर केंद्रित मावां-धीयां’ अभियान शुरू किया है। 21 सितंबर को रामपुरा फूल और नथाना में महिलाओं की सभाओं को संबोधित करने के बाद उन्होंने विरोध मार्च निकाले और पंजाब के राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे। अभियान में नशे, कथित पुलिस ज्यादती, महिलाओं की गरिमा और आर्थिक सहायता जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।

यह अभियान हरसिमरत की लगभग दो दशक पुरानी सार्वजनिक यात्रा के एक अलग चरण को दिखाता है। वर्ष 2008 में उन्होंने नन्ही छांव’ अभियान के जरिए बेटियों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को उठाया था। अब ‘मावां-धीयां’ के जरिए महिलाओं को सीधे राजनीतिक लामबंदी से जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है।

हरसिमरत ने कहा है कि पंजाब का भविष्य महिलाओं के हाथों में है और वह उनके अधिकार, सम्मान तथा न्याय के लिए आवाज उठाएंगी। अभियान के दौरान उन्होंने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर आरोप लगाए हैं। ये राजनीतिक आरोप हैं, जिनका उल्लेख संबंधित रिपोर्टों में उनके बयान के रूप में किया गया है।

और पढ़ें: पंजाब चुनाव से पहले बड़ा सियासी संकेत? पंजाब यूनिवर्सिटी चुनाव में भाजपा और अकाली दल के छात्र संगठन साथ आए

हरसिमरत 2009 में पहली बार बठिंडा से लोकसभा पहुंचीं और वर्तमान में चौथी बार सांसद हैं। संसद की मौजूदा अवधि में 13 अगस्त 2026 तक उनके नाम 29 बहसों में भागीदारी और 90 सवाल दर्ज हैं। उनकी उपस्थिति 69 प्रतिशत रही है।

उनकी राजनीतिक पहचान बादल परिवार से भी गहराई से जुड़ी है। वह शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की पत्नी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बहू हैं। उनके भाई बिक्रम सिंह मजीठिया भी अकाली राजनीति में प्रमुख चेहरा रहे हैं।

हरसिमरत 2014 से 2020 तक केंद्र में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री रहीं। सितंबर 2020 में उन्होंने कृषि कानूनों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। इसके बाद किसानों के मुद्दे उनकी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बने।

अब ‘मावां-धीयां’ अभियान के जरिए महिलाओं, नशे और सामाजिक मुद्दों को केंद्र में रखा गया है। आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह अभियान हरसिमरत की व्यक्तिगत राजनीतिक भूमिका और शिरोमणि अकाली दल की व्यापक राजनीतिक दिशा, दोनों के संदर्भ में चर्चा का विषय बना हुआ है।

और पढ़ें: पंजाब में बीजेपी-अकाली दल गठबंधन की बातचीत अभी खत्म नहीं, तीन बड़े सवालों पर मंथन

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share