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आईसीएमआर-एनआईएन के नेतृत्व वाले लेट्स फिक्स अवर फूड कंसोर्टियम ने बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार को लेकर नीति सुझाव जारी किए

आईसीएमआर-एनआईएन के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार और बेहतर खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए नीति संबंधी प्राथमिकताएं जारी की हैं।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन) के नेतृत्व वाले ‘लेट्स फिक्स अवर फूड’ (एलएफओएफ) कंसोर्टियम ने बुधवार को बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीति दस्तावेज जारी किया।

इस दस्तावेज का शीर्षक बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार और बेहतर खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिक नीति कार्रवाई’ रखा गया है। इसमें बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और खान-पान की आदतों को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।

कंसोर्टियम ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और किशोरों में असंतुलित आहार, अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन और पोषण संबंधी समस्याएं बड़ी चुनौती बन रही हैं। ऐसे में स्वस्थ भोजन की उपलब्धता और लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।

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नीति दस्तावेज में स्कूलों, परिवारों और समुदायों के स्तर पर स्वस्थ भोजन को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया गया है। इसमें बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने, अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की पहुंच को नियंत्रित करने और खाद्य वातावरण को बेहतर बनाने के लिए कई कदम सुझाए गए हैं।

आईसीएमआर-एनआईएन के विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में सही पोषण उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। स्वस्थ आहार की आदतें आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती हैं।

दस्तावेज में नीति निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई है। इसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण शिक्षा और स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयासों पर बल दिया गया है।

‘लेट्स फिक्स अवर फूड’ कंसोर्टियम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और संस्थान शामिल हैं, जो बच्चों के लिए बेहतर खाद्य प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि स्वस्थ भोजन को आसान और सुलभ बनाने के लिए व्यापक नीतिगत बदलाव जरूरी हैं। यह नीति दस्तावेज भारत में बच्चों और किशोरों के पोषण स्तर को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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