भारत-जर्मनी की घनिष्ठ आर्थिक साझेदारी मानवता के लिए महत्वपूर्ण: पीएम मोदी
पीएम मोदी और जर्मन चांसलर मर्ज ने अहमदाबाद में द्विपक्षीय वार्ता की, आर्थिक सहयोग, शिक्षा, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (12 जनवरी, 2026) को अहमदाबाद में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। यह चांसलर मर्ज की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो दो दिवसीय दौरे के तहत हो रही है। यह यात्रा भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जुड़ी है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करना है।
बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी उपस्थित थे। वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कौशल विकास और लोगों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की समीक्षा की गई। इसके साथ ही रक्षा, सुरक्षा, विज्ञान, नवाचार, अनुसंधान और सतत विकास में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज ने साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 का उद्घाटन किया और दोनों नेताओं ने पतंग उड़ाने का भी आनंद लिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग मानवता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नागरिकों के लिए जर्मनी द्वारा वीजा-फ्री ट्रांजिट की घोषणा के लिए चांसलर मर्ज का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंध और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री ने जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने का भी आमंत्रण दिया और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तैयार किए गए व्यापक रोडमैप को साझेदारी के लिए नई दिशा देने वाला बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन और गाजा सहित वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी आतंकवाद को मानवता के लिए गंभीर खतरा मानते हैं और इसके खिलाफ मिलकर लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही, उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार के लिए जी-4 समूह के तहत भारत-जर्मनी के प्रयासों का उल्लेख किया।
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