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कर्क संक्रांति 2026: 16 जुलाई को मनाया जाएगा पर्व, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

कर्क संक्रांति 16 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। स्नान, दान, पूजा-पाठ और सिद्धि योग में किए गए शुभ कार्य विशेष फलदायी माने गए हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार कर्क संक्रांति का पर्व इस वर्ष 16 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस बार तिथि को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार कर्क संक्रांति 16 जुलाई को ही मान्य होगी।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 16 जुलाई 2026 की रात 11 बजकर 45 मिनट पर सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश होगा। इस अवसर पर सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए पूजा-पाठ, दान और अन्य शुभ कार्यों का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

कर्क संक्रांति 2026 का पुण्य काल दोपहर 12:27 बजे से शाम 7:21 बजे तक रहेगा। वहीं महापुण्य काल शाम 5:03 बजे से 7:21 बजे तक रहेगा। इस दौरान पवित्र नदी में स्नान, सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करना तथा अन्न, वस्त्र और जरूरतमंदों को दान देना अत्यंत शुभ माना गया है।

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शुभ चौघड़िया के अनुसार सुबह 5:34 से 7:17 बजे, दोपहर 12:27 से 2:10 बजे, 2:10 से 3:54 बजे और शाम 5:37 से 7:21 बजे तक शुभ एवं अमृत काल रहेगा। रात्रि में 7:21 से 8:37 बजे तक अमृत चौघड़िया रहेगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कर्क संक्रांति से दक्षिणायन की शुरुआत होती है और सूर्य की उत्तरायण यात्रा समाप्त होती है। इसी समय से वर्षा ऋतु का प्रभाव भी अधिक स्पष्ट होने लगता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संक्रांति धन, समृद्धि और कृषि के लिए शुभ मानी जाती है। व्यापारियों के लिए भी यह समय मंगलकारी माना जाता है।

इस दिन व्रत, पूजा, जप, तप और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि श्रद्धा से किए गए पुण्य कार्य व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

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