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तीसरे सप्ताह भी जुमे की नमाज़ की अनुमति नहीं: मीरवाइज उमर फारूक

मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि उन्हें लगातार तीसरे सप्ताह भी श्रीनगर की जामा मस्जिद में जुमे का खुतबा देने की अनुमति नहीं मिली, जिससे उन्होंने गहरा दुख जताया।

कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता और मीरवाइज-ए-कश्मीर मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को कहा कि उन्हें लगातार तीसरे सप्ताह भी श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में जुमे का खुतबा (प्रवचन) देने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने एक बार फिर उन्हें मस्जिद जाने से रोक दिया।

मीरवाइज उमर फारूक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नाराज़गी और दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “एक और जुम्मा और एक बार फिर अधिकारियों ने मुझे जामा मस्जिद जाने की इजाजत नहीं दी। यह बेहद दुखद है कि इस असामान्य रूप से सूखी सर्दी के दौरान बारिश और बर्फबारी के लिए सामूहिक दुआ में मैं लोगों का नेतृत्व नहीं कर सका। हमारी दुआएं ही हमारी ताकत हैं, अल्लाह इन्हें कुबूल करे।”

मीरवाइज का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में उन्होंने अपने सोशल मीडिया बायो से ‘हुर्रियत चेयरमैन’ का पदनाम हटाया था। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रशासन की ओर से उन पर इस पदनाम को हटाने का दबाव बनाया गया। मीरवाइज के करीबी सूत्रों का कहना है कि इसके बाद उनके खिलाफ कथित तौर पर घर में नजरबंदी (हाउस डिटेंशन) का नया दौर शुरू हुआ।

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जामा मस्जिद श्रीनगर कश्मीर का एक प्रमुख धार्मिक और सामाजिक केंद्र माना जाता है, जहां हर शुक्रवार बड़ी संख्या में लोग नमाज़ अदा करने के लिए जुटते हैं। मीरवाइज को नमाज़ और खुतबा देने से रोके जाने को लेकर घाटी में धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मीरवाइज के समर्थकों और कई सामाजिक संगठनों ने इसे धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करार दिया है और स्थिति पर पुनर्विचार की मांग की है।

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