अतिथि विद्वानों की मांगों पर मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम, उच्चस्तरीय समिति गठित
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अतिथि विद्वानों की मांगों पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की। रिपोर्ट मिलने के बाद उनके हित में आवश्यक और संभव कदम उठाने का आश्वासन दिया।
मध्य प्रदेश सरकार ने अतिथि विद्वानों (गेस्ट फैकल्टी) की लंबे समय से लंबित मांगों पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार अतिथि विद्वानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गठित समिति अतिथि विद्वानों की सभी प्रमुख मांगों का विस्तृत अध्ययन करेगी। समिति विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करने के बाद अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सरकार उसके आधार पर आवश्यक और व्यावहारिक निर्णय लेगी।
मोहन यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है और इसमें अतिथि विद्वानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने आश्वासन दिया कि समिति की सिफारिशों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा तथा अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए सभी आवश्यक और संभव कदम उठाए जाएंगे।
राज्य के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि विद्वान लंबे समय से मानदेय, सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण, कार्य अवधि और अन्य सुविधाओं से जुड़ी मांगें उठा रहे हैं। इन मांगों को लेकर समय-समय पर प्रदर्शन और ज्ञापन भी दिए जाते रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा उच्चस्तरीय समिति का गठन उनके लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि समिति सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लेकर संतुलित और व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करेगी। इससे न केवल अतिथि विद्वानों की समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
अतिथि विद्वानों को उम्मीद है कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी और लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान होगा। फिलहाल सभी की निगाहें समिति की रिपोर्ट और उसके बाद सरकार द्वारा लिए जाने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं।
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