वक्फ बोर्ड की निष्पक्ष जांच हो तो बड़े घोटाले सामने आएंगे: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने वक्फ संपत्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगाए।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने उत्तर प्रदेश के सुन्नी और शिया वक्फ बोर्डों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर दोनों वक्फ बोर्डों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
मौलाना रजवी ने कहा कि वक्फ संपत्तियां समाज के गरीब, यतीम, विधवा और जरूरतमंद मुसलमानों के कल्याण के लिए दान की गई थीं। इन संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के कार्यों में होना चाहिए था। हालांकि, उनका आरोप है कि वक्फ बोर्ड से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोगों ने करोड़ों रुपये की वक्फ संपत्तियों को बेहद कम कीमत पर बेच दिया और उन्हें भू-माफियाओं के कब्जे में जाने दिया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में वक्फ संपत्तियों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा। मौलाना ने कहा कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए आजम खान वक्फ एवं हज विभाग के मंत्री थे। उनके कार्यकाल में नियुक्त बोर्ड पदाधिकारियों और अधिकारियों पर वक्फ की जमीनों में अनियमितताओं के आरोप हैं।
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मौलाना ने दावा किया कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े आर्थिक घोटालों का खुलासा हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि वक्फ की आय का सही उपयोग होता, तो गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों को व्यापक लाभ मिलता।
इसके साथ ही उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करने वालों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों को यह बताना चाहिए कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कितने मदरसे, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल या यतीमखाने स्थापित किए। उन्होंने मुख्यमंत्री से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की।
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