हाशिए पर रहने वाले मतदाताओं तक पहुंचेंगे स्थानीय चुनाव अधिकारी, SIR सुनवाई में मिलेगी मदद: पश्चिम बंगाल CEO
पश्चिम बंगाल के CEO ने जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे हाशिए पर रहने वाले मतदाताओं से मिलकर SIR सुनवाई में उनकी मदद करें, ताकि योग्य नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहें।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने राज्य में हाशिए पर रहने वाले और संवेदनशील मतदाताओं को बड़ी राहत देते हुए एक अहम निर्देश जारी किया है। इसके तहत सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, जो जिला मजिस्ट्रेट भी होते हैं, को कहा गया है कि वे स्वयं ऐसे मतदाताओं से मुलाकात करें और विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत चल रही सुनवाई प्रक्रिया में उनकी मदद करें।
इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योग्य मतदाता किसी भी तरह की सामाजिक, आर्थिक या दस्तावेज़ी बाधा के कारण मतदाता सूची से बाहर न रह जाएं। इसमें विशेष रूप से यौनकर्मी, आदिवासी समुदायों के सदस्य और अन्य कमजोर वर्गों के लोग शामिल हैं, जिन्हें अक्सर आवश्यक दस्तावेज़ जुटाने में कठिनाई होती है।
CEO कार्यालय के अनुसार, कई प्रतिनिधि संगठनों और कमजोर समुदायों के लोगों ने यह शिकायत की थी कि वे 2002 की मतदाता सूची में अपनी वंशावली या नाम से जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं ढूंढ पा रहे हैं। इसके अलावा, गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक हाशिए पर होने के कारण वे आवश्यक दस्तावेज़ भी प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं, जबकि वे वास्तव में योग्य मतदाता हैं।
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इन समुदायों ने बार-बार SIR के मानकों में ढील देने की मांग की थी, ताकि दस्तावेज़ों के अभाव में भी उनकी पात्रता पर विचार किया जा सके। इसी को ध्यान में रखते हुए CEO ने जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से ऐसे मतदाताओं तक पहुंचें, उनकी स्थिति समझें और सुनवाई के दौरान उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करें।
निर्वाचन आयोग का मानना है कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक समावेशी बनाएगा तथा यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी योग्य नागरिक केवल अपनी सामाजिक या आर्थिक स्थिति के कारण मताधिकार से वंचित न रहे।
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