देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में पोस्टग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल की 18,000 से अधिक सीटें खाली रहने के बाद NEET PG-2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ में कमी की गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार (14 जनवरी 2026) को बताया कि काउंसलिंग के दो दौर पूरे होने के बावजूद बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई थीं, जिसके चलते नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) को यह फैसला लेना पड़ा।
अधिकारियों के अनुसार, यह कदम उपलब्ध सीटों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, क्योंकि ये सीटें देश में प्रशिक्षित मेडिकल विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए बेहद अहम हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि अगर ये सीटें खाली रह जाती हैं तो इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
NBEMS ने इस सप्ताह की शुरुआत में घोषणा की थी कि NEET PG-2025 की तीसरी काउंसलिंग के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल को आरक्षित श्रेणियों के लिए घटाकर शून्य कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि परीक्षा में शामिल होने वाले सभी उम्मीदवार, यहां तक कि वे भी जिन्होंने माइनस 40 अंक तक प्राप्त किए हैं, अब काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र होंगे।
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अधिकारियों ने बताया कि कट-ऑफ में यह संशोधन अस्थायी और आवश्यकता आधारित है, ताकि देशभर में पीजी मेडिकल सीटों का बेहतर उपयोग हो सके। खासकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस कदम से न केवल सीटों की बर्बादी रुकेगी, बल्कि भविष्य में अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को अधिक प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर भी उपलब्ध हो सकेंगे।
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