नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 1003 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब चार हजार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच शव नंबर 1003 को लेकर पहचान का पेचीदा मामला सामने आया है। इस शव पर अलग-अलग परिवारों ने अपने परिजन का होने का दावा किया, जिससे प्रशासन के सामने उसकी वास्तविक पहचान करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
बाढ़ के दौरान मलबे में दबने और लंबे समय तक पानी में रहने के कारण कई शवों की हालत बेहद खराब हो गई है। कई शवों के चेहरे पहचान में नहीं आ रहे हैं। ऐसे में परिजन कपड़ों, शरीर की बनावट, गहनों और अन्य पहचान चिह्नों के आधार पर अपने रिश्तेदारों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
शव नंबर 1003 पर किसने किया दावा?
एक परिवार ने शव नंबर 1003 को बर्दिया के जलविद्युत परियोजना कर्मचारी गोपाल दहित का बताया है। वहीं, दूसरे परिवार ने दावा किया कि यह शव रूपनदेही के पर्यटक गाइड दामोदर बस्याल का है। रविवार को एक तीसरे परिवार ने भी शव पर अपना दावा किया था, लेकिन बाद में उसने अपना दावा वापस ले लिया।
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अब दो परिवार इस शव को अपने परिजन का बता रहे हैं। दोनों दावों के कारण प्रशासन के सामने स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। शव की मौजूदा हालत को देखते हुए केवल बाहरी पहचान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना मुश्किल है।
डीएनए जांच से सुलझेगा मामला
अधिकारियों के सामने अब शव की सही पहचान के लिए डीएनए जांच सबसे विश्वसनीय तरीका माना जा रहा है। संबंधित परिवारों के नमूनों से शव के डीएनए का मिलान कराया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शव वास्तव में किस परिवार के लापता सदस्य का है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण शवों की पहचान और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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